COOLING WET PACK

पेट की पट्टी लगाने की विधि

विधि- एक सफेद मोटा सूती कपड़ा (चादरनुमा) लगभग एक मीटर चैड़ा और 2 1/2 मीटर लम्बालेकर उसे लम्बाई में चार तहकर ले। लगभग 9 इंच चैड़ी 2 1/2 मीटर लम्बी पट्टी बनाएं और साधारण ठण्डे पानी में भिगोकर तथा निचोड़कर व्यक्ति अपने पूरे पेट पर (नाभि को बीच में रखकर आधी पट्टी नाभि से ऊपर और आधी नाभि से नीचे होनी चाहिये) कमर से घुमाकर लपेट ले जैसे नहाने के बाद तौलियालपेटते है। यदि सर्दी बहुत है अथवा रोगी बहुत कमजोर है तो गीली पट्टी के ऊपर कोई पतला तौलिया या ऊनी कपड़ा लपेटें। आवश्यकता के अनुसार ऊपर से कपड़े पहन कर अपना कोई भी दैनिक कार्य या आराम करें। यह पट्टी 20-40 मिनट तक दिन में तीन या चार बार लगाऐं। यह पट्टी भोजन के पहले लगाना अधिक अच्छा है परन्तु ऐसा संभव न हो तो दिन में किसी भी समय लगाई जा सकती है। केवल इस बात का ध्यान रखना है कि जिस समय पट्टी लगाई हुई हो, उस समय कुछ खाना-पीना नहीं है यदि खाना ठीक से न पचता हो तो पट्टी को खाने खाने के बाद लगाने पर खाना हज़म करने में सहायता मिलती है। आपातकाल स्थिति एवं तीव्र रोग की अवस्था में शरीर पर बंधी गीली पट्टी के भाग को वायु के संपर्क में रहने दें। अर्थात गीली पट्टी को सामान्य कपड़ों से न ढकें। प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों में गीली मिट्टी का प्रयोग आमतौर पर बताया जाता है। परन्तु आजकल के व्यस्त जीवन में उपयुक्त मिट्टी को ढूँढ़ना, घर में रखना, साफ करना असुविधाजनक है। मिट्टी की पट्टी में भी विशेष लाभ तो पानी से ही होता है। यही लाभ गीले कपड़े की पट्टी से लिया जा सकता है। यह करने में भी आसान है।

The cooling abdominal wet pack

It is a well-known fact that without a background of constipation and dyspepsia no chronic disease can be there. Almost in every such condition the organs in the abdominal cavity happen to be clogged. Blood circulation in that region is very poor. There is inflammation over the mucus membranes over most of the organs therein. There is also gas formation and the consequent discomfort.A cooling abdominal wet pack over the region will give the much-needed relief to the patient. A cotton cloth approximately a metre in width and two to two-and-a-half metres in length is utilised for the purpose.

The ideal thing woulb be that the cloth chosen should be capable of causing some friction over the skin when the jpack is put over. From this point of view, the Khadi cloth or at least a handloom cloth is to be used. Fold the cloth four times in its width. Let the folded cloth be dipped in bearably cool water, the water squeezed out and then let the pack be wrapped round the abdomen (Fig) After having wrapping it, let two safety pins be put over the pack so that the pack remains fairly firm. Over this wet pack, which will not be dripping with water, let the usual clothes be worn to the extent needed.

The application of this abdominal wet pack will create conditions where under eliminatory activities in that region will be quickened, gas will automatically go out, blood circulation as also the nerve activity will improve.

Even where the weather happens to be very cold, the excess warmth in the abdominal cavity is there. Hence a cooling wet pack is put as indicated in the earlier paragraphs. Immediately after wrapping the wet cloth, take a scarf or muffler more or less of the same width as that of the pack and wrap that round over the wet pack, put on the safety pins over the scarf and requisite clothes over the body. This pack is called the stimulating abdominal wet pack. In winter such a pack may be necessary. In the case of very weak patients this pack will be more useful than the cooling abdominal wet pack even in summer.

ठण्डी और गर्म पट्टी

घुटनों, गुर्दे की पथरी, पीठ आदि में अत्यधिक दर्द (पीड़ा) होने पर बारी-बारी गर्म और ठण्डी पट्टियों का प्रयोग करने सें दर्द शांत होता है। दो बर्तन लें। एक में ठण्डा और दूसरे में गर्म जल रखें। पहले गर्म जल में छोटी पट्टी भिगोकर और निचोड़ कर प्रभावित स्थान के आस-पास एक-दो मिनट तक लगाएं। इसके पश्चात इसी प्रकार ठण्डे पानी की छोटी पट्टी आधा मिनट तक लगाएं। 10 से 15 मिनट तक इसी प्रकार बार-बार करते रहें और अन्त में ठण्डे पानी की पट्टी 30 मिनट तक लगी रहने दंे। इससे रक्तसंचार सामान्य होता है और उस समय दर्द होनाबंद हो जाता है।

Alternate Hot and Cold packs

If in any particular case some pain is experienced in some part of the body, let the local wet pack be tried. In most cases this may be enough. But where the requisite relief is not coming forth, alternate hot and cold packs may be had. The packs are applied in this manner: Have two small basins, one with hot water(as hot as bearable) and the other with cool water. The cloth to be applied over the affected region should naturally be folded to the requisite size. Dip one folded cloth in the hot water, squeeze it and put it gently about 8-10 centimetres above the painful point with same pressure. In a minute or so the heat in the folded cloth would have lessened considerably. In the meantime, the other folded cloth dipped in cold water and squeezed is to be applied over the same area for about 20 seconds. Repeat this hot and cold pack a number of times, say ten to fifteen times. At the end of the last cold application, apply a cold pack over the entire area for about 20-30 minutes, or even longer. Let the patient rest. This will reduce the pain considerably.

स्थानीय शीतल गीली पट्टी

एक सफेद मोटा सूती रूमालनुमा कपड़ा साधारण पानी में भिगोकर निचोड़कर शरीर के किसी भी भाग में फोड़ा, घाव या दर्द होने पर पीड़ा के स्थान के आस-पास के भाग पर 15-20 मिनट के लिए लगाने से शरीर के उस भाग की ओर खून का दौरा (संचार) बढ़ जाता है, जिससे लाभ होता है। गले सम्बन्धी कोई भी रोग हो तो गले पर गीली पट्टी लगाएं, सिर दर्द, अनिद्रा या तनाव आदि की अवस्था में माथे पर गीली पट्टी लगाएं। इस पट्टी के साथ-साथ पेट की गीली पट्टी भी लगी रहने से विशेष लाभ होता है। शरीर के किसी भी अंग में अधिक पीड़ा होने पर, उस अंग को ठण्डे जल से डुबोकर रखें। थोड़ी देर में पीड़ा बन्द हो सकती है। उस अंग को पानी से निकालकर उस पर ठंडी गीली पट्टी लगा लें। जब तक पीड़ा कम न हो, यह प्रयोग करते रहें। यह बात ध्यान रखने योग्य है कि शरीर में कहीं भी किसी प्रकार की पीड़ा होती हो तो उस दिन भोजन नहीं करना चाहिए। शांत मन से पट्टियों के साथ उपवास भी करें तो जल्दी आराम मिल जाता है।

Local cooling packs

Such packs can be applied with using folded cloth of proper dimensions required over the forehead region, over the neck or anywhere on the body. The benefits derived are the same as indicated earlier. Wherever such local packs are applied, ensure that the abdominal pack is there.

In the case of headaches, a pack over the forehead along with an abdominal wet pack is what is required. In the case of throat, tonsillitis, laryngitis, etc. a pack over the neck along with an abdominal wet pack is what is required.

Wherever there is a boil or skin irritation or wound a local wet pack can be applied with great benefit.

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