स्वाइन फ्लू (H1N1) से कैसे बचें: जानिए लक्षण, कारण और प्राकृतिक चिकित्सा द्वारा स्थायी समाधान

स्वाइन फ्लू (H1N1) ये वही वायरस है जिसका नाम सुनते ही 2009 की वैश्विक महामारी की याद आ जाती है। इस भयंकर महामारी के कारण भारत में 2009 से 2010 के बीच 1,800 से अधिक लोगों की मृत्यु हुई थी।
स्वाइन फ्लू के प्रमुख लक्षण (Symptoms)
स्वाइन फ्लू की चपेट में आने पर अधिकांश लोगों को शरीर में निम्नलिखित लक्षण दिखाई देने लगते हैं:
- तेज बुखार और शरीर में कंपकंपी
- अत्यधिक थकान और शारीरिक कमजोरी
- लगातार खांसी, गले में खराश या दर्द
- सिरदर्द और मांसपेशियों में तेज खिंचाव
- नाक बहना या सांस लेने में भारीपन
- भूख न लगना और कभी-कभी उल्टी या दस्त होना
- कुछ मामलों में सांस लेने में कठिनाई होना या सांस फूलना, छाती या पेट में लगातार दर्द या दबाव महसूस होना, अचानक चक्कर आना, लगातार उल्टी होना जैसे गंभीर लक्षण तक दिखाई देते हैं।
स्वाइन फ्लू (H1N1) क्या है?
According to modern medical science स्वाइन फ्लू H1N1 एक श्वसन संक्रमण (Respiratory Infection) है, जो H1N1 इन्फ्लूएंजा वायरस के कारण होता है। यह वायरस हवा के माध्यम से, संक्रमित व्यक्ति के छींकने, खांसने या दूषित सतहों को छूने से तेजी से फैलता है लेकिन प्राकृतिक चिकित्सा (Nature Cure) का नजरिया थोड़ा अलग है। चलिए इसे समझते हैं :
जब हम गलत खान-पान, पका हुआ भोजन और Processed फूड जैसे –
- पैक्ड ड्राई फ्रूट्स
- पैक्ड दूध व दही
- पैकेट वाले चिप्स और नमकीन
- बिस्कुट
- कुकीज और केक
- कोल्ड ड्रिंक्स और पैक्ड फ्रूट जूस
- ब्रेड
- पाव
- बर्गर
- पिज्जा
- फ्रोजन रेडी-टू-ईट मील्स
इत्यादि आहार अधिक मात्रा में लेते हैं, तो शरीर में गंदगी जमा होने लगती है। इसी जमी हुई गंदगी की वजह से जब शरीर में टॉक्सिन्स हद से ज्यादा बढ़ जाते हैं, तो शरीर स्वयं तीव्र रोगों (Acute Diseases) जैसे –
- बुखार (Fever)
- सर्दी
- जुकाम और छींकें (Common Cold & Sneezing)
- खांसी (Cough)
- दस्त या उल्टी (Diarrhea & Vomiting)
- फोड़े-फुंसियाँ (Boils)
के जरिए उन्हें बाहर निकालने की कोशिश करता है। ये रोग हमारी भलाई के लिए आते हैं नुकसान के लिए नहीं ताकि जमी हुई गंदगी इन रास्तों से बाहर निकल जाए।
प्राकृतिक चिकित्सा (Naturopathy) से स्वाइन फ्लू का उपचार और बचाव
प्राकृतिक जीवनशैली (Natural Life Style) के अनुसार, दवाइयों से बुखार को दबाने के बजाय शरीर को सफाई का अवसर देना चाहिए। दवाइयाँ लेने से “स्वाइन फ्लू” में हुए बुखार के लक्षण कुछ समय के लिए दब जाते हैं, सही नहीं होते। प्राकृतिक जीवनशैली (Natural Life Style) के इन सुझावों को अपनी दिनचर्या में शामिल करने से आप बिना किसी दुष्प्रभाव के स्वाइन फ्लू से बच सकते हैं और उपचार भी कर सकते हैं:
1. उपवास और रसाहार (Fasting & Juice Therapy)
- लंघनम् परम् औषधम्: “स्वाइन फ्लू” की स्थिति में, बुखार की हालत में पका हुआ खाना पूरी तरह बंद कर दें। पाचन तंत्र को विश्राम मिलने से शरीर की प्राणशक्ति शरीर की सफाई करती है, पड़ी हुई गंदगी को बाहर निकालती है। ऐसी हालत में 1-2 दिन केवल नारियल पानी, पपीता जूस, मौसमी ताजी सब्जियों का रस बिना नमक या चीनी के लें (NLS White Chart फॉलो करें।), 1 2 दिन में जब बुखार उतर जाए तब fruits लें (NLS Green Chart फॉलो करें।), जब पूरी तरह ठीक हो जाएं तब अपनी normal diet पर या जाएं।
2. प्राकृतिक जल चिकित्सा (Hydrotherapy)
- NLS सूखी-ठंडी पट्टी: बुखार या गले में सूजन होने पर पेट और गले पर ठंडी-सूखी पट्टी का प्रयोग करें। यह शरीर के तापमान को संतुलित करती है और अंदर की गर्मी व टॉक्सिन्स को खींचती है।
- आंतों में पड़ी गंदगी को जल्दी से जल्दी बाहर निकालने के लिए Non-violent enema का इस्तेमाल करें।
3. धूप और ताजी हवा (Sunlight & Fresh Air)
- सूर्य स्नान (Sunbath): यदि बुखार तेज न हो तो रोज सुबह 15 20 मिनट हल्की धूप में बैठें। सूर्य की किरणें प्राकृतिक कीटाणुनाशक हैं और विटामिन डी प्रदान कर इम्युनिटी बढ़ाती हैं।
- NLS अहिंसक प्राणायाम: खुली हवा में गहरी सांस लेने (Deep Breathing) से फेफड़ों को ऑक्सीजन मिलती है और श्वसन तंत्र मजबूत होता है। (NLS अहिंसक प्राणायाम कैसे करें image)
Note –
- यदि बुखार तेज हो तो माथे की पट्टी लगातार बदल बदलकर रखनी है।
- यदि बुखार फिर भी नीचे न आए तो पूरी body को ताजे पानी के भीगे Towel से sponge करें।
- यदि ये सब करने के बाद भी बुखार न उतरे या आप consultation लेना चाहें तो हमारे फ्री healthcare number 9876291635 पर call करें।



